गुना में एसडीएम ने, किसानों को दिलाई नरवाई न जलाने की शपथ
गुना प्रशासन का सख्त रुख: खेतों में नरवाई जलाने पर लगाम कसने की तैयारी
गुना: जिला प्रशासन ने फसल कटाई के बाद खेतों में अवशेष यानी नरवाई जलाने की प्रवृत्ति पर कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल के कड़े निर्देशों के अनुपालन में, तहसील आरोन की अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) सुश्री मंजुषा खत्री ने राजस्व और कृषि विभाग के अमले के साथ औचक दौरा किया। उन्होंने ग्राम बनवीर खेड़ी में आयोजित एक विशेष ग्राम चौपाल के दौरान सीधे तौर पर स्थानीय किसानों और ग्रामीणों से संवाद स्थापित किया और खेतों में आग न लगाने की पुरजोर अपील की।
कृषि और राजस्व विभाग ने गिनाए नरवाई जलाने के गंभीर दुष्परिणाम
ग्राम चौपाल के दौरान मौके पर मौजूद कृषि विभाग की विशेषज्ञ टीम ने किसानों को वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर जागरूक किया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि नरवाई जलाने से न केवल भूमि की उर्वरक शक्ति और मित्र कीट नष्ट होते हैं, बल्कि पर्यावरण में गंभीर प्रदूषण भी फैलता है। इसके अलावा, आग की चपेट में आकर कई बार खड़ी फसलें और आसपास के जंगल भी स्वाहा हो जाते हैं। टीम ने किसानों को फसल अवशेषों के सुरक्षित प्रबंधन और आधुनिक तकनीकों के बारे में विस्तार से जानकारी दी, जिससे कचरे को खाद में बदला जा सके।
एसडीएम मंजूषा खत्री ने दिलाई सामूहिक संकल्प
कार्यक्रम के अंत में एसडीएम सुश्री मंजूषा खत्री ने पहल करते हुए सभी कृषकों और ग्रामीणजनों को भविष्य में कभी भी अपने खेतों में नरवाई न जलाने की शपथ दिलाई। प्रशासन की इस अनूठी और संवादात्मक पहल का उद्देश्य किसानों को दंडात्मक कार्रवाई के बजाय स्वप्रेरणा से पर्यावरण संरक्षण के लिए आगे लाना है। स्थानीय प्रशासन ने चेतावनी दी है कि यदि इसके बावजूद कोई किसान नियमों की अनदेखी करता पाया गया, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
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