गुना कलेक्टर ने छोड़ी कुर्सी, जमीन पर बैठकर सुनी बुजुर्ग महिला की फरियाद
गुना कलेक्ट्रेट में दिखा मानवता का अनूठा दृश्य
गुना: मानवीय संवेदनाओं और प्रशासनिक मुस्तैदी की एक ऐसी बानगी सामने आई है जिसने सबको अचंभित कर दिया है। गुना कलेक्ट्रेट परिसर में उस वक्त एक भावुक माहौल बन गया, जब जिला कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल ने अपनी कुर्सी का मोह त्यागकर एक बुजुर्ग महिला के पास जमीन पर बैठकर उसकी फरियाद सुनी। इस दौरान जिला पंचायत सीईओ और एसडीएम ने भी पद की गरिमा से ऊपर उठकर जमीन पर बैठकर ही बुजुर्ग की पीड़ा को गंभीरता से सुना और हरसंभव मदद का आश्वासन दिया।
कुर्सी छोड़ जमीन पर बैठे कलेक्टर किशोर कन्याल
प्राप्त जानकारी के अनुसार, एक बुजुर्ग महिला अपनी गंभीर समस्या लेकर कलेक्ट्रेट पहुंची थी। महिला को इस प्रकार विचलित देख कलेक्टर किशोर कन्याल खुद से रह नहीं सके और अपनी कुर्सी छोड़कर सीधे उस बुजुर्ग महिला के पास जमीन पर जा बैठे। कलेक्टर साहब को इस प्रकार जमीन पर बैठा देख जिला प्रशासन के अन्य अधिकारी भी प्रेरित हुए। यह घटना इस बात का प्रमाण है कि प्रशासनिक पदों पर बैठे अधिकारियों के लिए जनता की सेवा और संवेदनशीलता सबसे पहले आनी चाहिए।
सीईओ और एसडीएम ने भी दिखाई आत्मीयता
कलेक्टर के बाद जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभिषेक दुबे ने भी आगे बढ़कर बुजुर्ग महिला की समस्या को उसी आत्मीयता के साथ जमीन पर बैठकर सुना। उन्होंने पूरी परेशानी की गहराई से जानकारी ली और त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके कुछ ही देर बाद, एसडीएम शिवानी पांडे ने भी मौके पर पहुंचकर बुजुर्ग महिला से मुलाकात की। एसडीएम ने महिला को ढांढस बंधाते हुए आश्वस्त किया कि जिला प्रशासन उसकी हरसंभव सहायता करेगा और उसे किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ेगा।
प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बनी यह पहल
गुना जिले में घटी यह घटना सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर चर्चा का मुख्य विषय बनी हुई है। आमतौर पर जनता और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच की दूरी की आलोचना होती है, लेकिन गुना कलेक्टर और उनकी टीम ने जिस प्रकार संवेदनशीलता और मानवता का परिचय दिया है, उसने यह साबित कर दिया है कि जनसमस्याओं के समाधान के लिए कुर्सी का अहंकार नहीं, बल्कि दिल से जुड़ाव होना जरूरी है। इस पूरी कार्रवाई से पीड़ित बुजुर्ग महिला को भी न्याय की उम्मीद बंधी है।
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