दिल्ली मार्च से पहले हापुड़ में सपा नेता हाउस अरेस्ट
हापुड़ में सपा नेताओं की नजरबंदी से सियासी पारा चढ़ा
हापुड़: आगामी 7 अक्टूबर बुधवार को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के नेतृत्व में होने वाले संयुक्त पैदल मार्च से ठीक पहले उत्तर प्रदेश प्रशासन ने दमनकारी रुख अपना लिया है। मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को लेकर आयोजित इस विरोध प्रदर्शन में शामिल होने से रोकने के लिए विपक्षी दलों के कार्यकर्ताओं को उनके घरों में ही नजरबंद (हाउस अरेस्ट) किया जा रहा है। हापुड़ जिले में समाजवादी पार्टी के नेतृत्व के खिलाफ यह कार्रवाई बड़े पैमाने पर चल रही है।
प्रशासनिक कार्रवाई पर भड़के सपा जिला उपाध्यक्ष
पदमसिंह जाटव, जो समाजवादी पार्टी के हापुड़ जिला उपाध्यक्ष हैं, ने इस प्रशासनिक कार्रवाई की कड़ी निंदा की है। उन्होंने तीखा रुख अपनाते हुए प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार पर सीधा हमला बोला है। जाटव ने कहा कि पुलिस बल और दमनकारी नीतियों के जरिए सरकार भले ही समाजवादी कार्यकर्ताओं को शारीरिक रूप से उनके घरों में कैद करने का प्रयास कर रही हो, लेकिन वे पार्टी की विचारधारा और जनता के अधिकारों की आवाज को दबाने में कभी कामयाब नहीं होंगे।
2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर गरमाई सियासत
सपा नेताओं का कहना है कि सरकार की यह बौखलाहट इस बात का स्पष्ट संकेत है कि उत्तर प्रदेश में आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव में सत्ता परिवर्तन तय है और मौजूदा हुकूमत विपक्षी दलों की बढ़ती ताकत से डरी हुई है। स्थानीय स्तर पर हापुड़ में भी समाजवादी पार्टी लगातार चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े गंभीर मुद्दों पर जन-जागृति अभियान और विरोध कार्यक्रम चला रही है, जिससे राजनीतिक सरगर्मी काफी बढ़ गई है।
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