मेरठ: MLC चुनाव में मतदाताओं की अनदेखी, DM को सौंपा ज्ञापन
मेरठ में विधान परिषद चुनाव: हजारों पात्र मतदाता सूची से बाहर
मेरठ: उत्तर प्रदेश के मेरठ जनपद में विधान परिषद (MLC) चुनाव की मतदाता सूची को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जन सहभागिता फाउंडेशन ट्रस्ट के बैनर तले कार्यकर्ताओं ने 'वोट में है दम, वोट से हैं हम' जैसे नारों वाले तख्तियां लेकर कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया। संस्था के अध्यक्ष एम. बिलाल मंसूरी के नेतृत्व में एक प्रतिनिमंडल ने जिलाधिकारी के माध्यम से राज्य निर्वाचन आयोग को ज्ञापन सौंपा, जिसमें आरोप लगाया गया है कि प्रशासनिक लापरवाही के चलते हजारों योग्य मतदाता अपने लोकतांत्रिक अधिकार से वंचित रह गए हैं।
व्यापक प्रचार-प्रसार की कमी और व्यवस्था पर गंभीर सवाल
आर के शर्मा की पड़ताल में सामने आया है कि 2011 की जनगणना के अनुसार मेरठ की कुल आबादी 34 लाख 43 हजार से अधिक है और जिले में सौ से ज्यादा शिक्षण संस्थान एवं महाविद्यालय हैं, जहां से हर साल हजारों छात्र स्नातक (ग्रेजुएट) की डिग्री लेकर निकलते हैं। इसके बावजूद, मौजूदा MLC मतदाता सूची में मात्र 15,753 मतदाताओं के नाम दर्ज होना निर्वाचन प्रणाली की पोल खोलता है। ट्रस्ट ने आरोप लगाया है कि निर्वाचन आयोग और संबंधित अधिकारियों ने सूची तैयार करने से पहले व्यापक प्रचार-प्रसार नहीं किया। न तो ड्राफ्ट सूची सार्वजनिक की गई और न ही आधिकारिक वेबसाइट पर बीएलओ (BLO) या ईआरओ (ERO) के संपर्क नंबर अपडेट किए गए थे।
लोकतंत्र की हत्या का आरोप, पारदर्शी चुनाव की मांग
पत्रकारों से बातचीत करते हुए जन सहभागिता फाउंडेशन के अध्यक्ष एम. बिलाल मंसूरी ने दो टूक शब्दों में कहा कि यह सीधे तौर पर लोकतंत्र की हत्या है। यदि नागरिकों से वोट देने का उनका बुनियादी अधिकार ही छीन लिया जाएगा, तो लोकतांत्रिक व्यवस्था का कोई औचित्य नहीं रह जाता। उन्होंने स्पष्ट किया कि मतदाताओं तक पहुंचना और उन्हें जागरूक करना चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है, जिसका ठीकरा आम जनता की अज्ञानता पर नहीं फोड़ा जा सकता। लोकसभा और विधानसभा चुनावों की तरह विधान परिषद चुनावों में भी पारदर्शिता बरतने की पुरजोर मांग की गई है।
ज्ञापन सौंपने वाले प्रमुख प्रतिनिधि
जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपने वाले प्रतिनिधिमंडल में संस्था के कोषाध्यक्ष मोहसिन मंसूरी, जनहित वेलफेयर सोसाइटी के अध्यक्ष गजेंद्र कुमार, दिव्यांग जनशक्ति सेवा समिति के अध्यक्ष रोहित कुमार, जमीयत उलेमा-ए-हिंद देहात के जनरल सेक्रेटरी मौलाना मोमिन महमूदी, सरफराज सैफी और रियाजुद्दीन समेत कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। सभी ने चेतावनी दी है कि जब तक प्रत्येक पात्र स्नातक मतदाता को सूची से नहीं जोड़ा जाता, तब तक यह चुनाव प्रक्रिया निष्पक्ष नहीं मानी जा सकती।
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