गुना: 20 साल से फरार 10 हजार का इनामी बदमाश गिरफ्तार
20 साल का लंबा इंतजार खत्म, गुना पुलिस के हत्थे चढ़ा कुख्यात इनामी
गुना: जिले के चाचौड़ा थाना क्षेत्र के अंतर्गत वर्ष 2006 में हुए चर्चित कोन्याकला घटनाक्रम में पिछले दो दशकों से कानून की आंखों में धूल झोंक रहे 10 हजार रुपये के इनामी फरार आरोपी को पुलिस ने धर दबोचा है। पुलिस अधीक्षक श्रीमती हितिका वासल के नेतृत्व में चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत इस बड़ी सफलता को हासिल किया गया है। गिरफ्तार किए गए आरोपी की पहचान हरिसिंह (65 वर्ष) पुत्र स्व. भंवरलाल भील, निवासी ग्राम कोदयापुरा के रूप में हुई है, जो पिछले 20 वर्षों से पुलिस की पकड़ से दूर था।
क्या था पूरा कोन्याकला घटनाक्रम?
गौरतलब है कि वर्ष 2006 में चाचौड़ा थाना क्षेत्र के ग्राम कोन्याकला में भील समाज द्वारा समुदाय हिंसा भड़काने के उद्देश्य से एक महापंचायत बुलाई गई थी। इस गैरकानूनी महापंचायत को रोकने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जब पुलिस बल मौके पर पहुंचा, तो उपद्रवियों ने सुनियोजित तरीके से पुलिस दल पर कातिलाना हमला कर दिया था। इस हिंसक झड़प में ड्यूटी पर तैनात निरीक्षक वीर सिंह सप्रे शहीद हो गए थे, जबकि कई अन्य पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हुए थे। इस खौफनाक वारदात के बाद चाचौड़ा थाने में अपराध क्रमांक 447/06 के तहत धारा 302, 307, 353, 395, 147, 148 और 149 भादवि के तहत गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया था।
गुप्त सूचना पर त्वरित कार्रवाई और गिरफ्तारी
घटना के बाद से ही मामले के तमाम आरोपी फरार चल रहे थे। पुलिस अधीक्षक गुना ने फरार चल रहे सभी आरोपियों पर 10-10 हजार रुपये का इनाम घोषित कर रखा था। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक प्रशांत सिंह सुमन और एसडीओपी चाचौड़ा मनोज कुमार झा के मार्गदर्शन में चाचौड़ा थाना प्रभारी निरीक्षक दिलीप राजौरिया की विशेष टीम ने मुखबिर तंत्र को सक्रिय किया। 4 नवंबर को प्राप्त पुख्ता सूचना के आधार पर पुलिस ने घेराबंदी कर आरोपी हरिसिंह को दबोच लिया। पुलिस ने आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए आरोपी को माननीय न्यायालय के समक्ष पेश कर दिया है। इस पूरी कार्रवाई को अंजाम देने वाली पुलिस टीम में थाना प्रभारी दिलीप राजौरिया, उपनिरीक्षक मोहर सिंह गवली, सउनि राकेश सिंह भील, प्रधान आरक्षक अमित भारद्वाज, अंकेश मोरी, विष्णु गुर्जर और अशोक बारिया की भूमिका सराहनीय रही।
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